उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।


Pawan Belala Says

कोई प्यार करो, कोई प्यार करो, मेरे देश से सब प्यार करो।
भष्ट्राचारी और दुराचारियों की फौज से, मेरे देश का तुम उद्धार करो।
क्रांतिकारी, वीर-सैनिकों को याद करके, जननी माताओं को प्रणाम करो।
आजादी की यज्ञ वेदी में आहुति देने वाले, हर बन्दे को तुम सलाम करो।
उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..।

राते मैंने भी गुजारी हैं, आशिकों की बस्ती में।
जाम मैंने भी चखा हैं, मदहोशी और मस्ती में।
पर सुकून तो मिलता हैं, देशभक्तों की बारातो में।
खून की होली में और गोलियों की दीपावली से, जयचंदों का काम तमाम करो।
उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो।

दर्द तुझे भी हैं, दर्द मुझे भी हैं, इस दर्द का कोई समाधान करो।
बहुत बहाया जाति-धर्म नाम पर, लाल कतरे का और ना अपमान करो।
आशिक़ हूँ, इस लाल लहू का, तुम और मत लहूलुहान करो।

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